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Seekhna Sikhana

काव्यशाला

How to Write Poetry | Kavita, Ghazal kaise likhen | कविता, नज़्म, ग़ज़ल कैसे लिखें | Prashant Bebaar Kaavyashala Session…
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Dareeche

आज की आधुनिक हिंदी-उर्दू (हिंदुस्तानी) कविता महज़ किसी हसीना के हुस्न और फ़क़त गुलो-बुलबुल के नग़मों का व्याख्यान ही नहीं…

प्रशान्त ‘बेबार’

प्रशान्त ‘बेबार’ ने जीवन के अनूठे तजुर्बे और एहसासों को अपनी रचनाओं में उतारा है। नज़्मनिगारी के अलावा कहानी और गीत-लेखन में भी बेबार ने मुक्कमल मुक़ाम दर्ज किए हैं। उनकी कथा और कविताएँ देश-विदेश की विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में छपती रहती हैं। बेबार पी.डब्लू.ओ (पोयट्री वर्ल्ड ऑर्गनाईज़ेशन) के ‘अल्फ़ाज़ 2019’ और ‘विंगवर्ड काव्य पुरस्कार 2019’ से नवाज़े जा चुके हैं एवं अनेक साहित्यिक-कला संगोष्ठियों में भागीदारी रखते हैं। अख़बार-पत्रिका के अलावा सोशल-मीडिया के ज़रिए भी ‘बेबार’ अपनी बात वक़्त-दर-वक़्त लोगों तक पहुँचाते रहते हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में गहरी दिलचस्पी और सक्रियता उनकी रचनाओं में बख़ूबी उजागर है।

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ज़िन्दगी ख़त्म से शुरु होती

फिर मुस्कुराएगा हिन्दोस्तान

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कुछ तुम कहो, कुछ हम कहें

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मैं शायर तो नहीं ..

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आओ नज़्म कहें ..

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एक प्यार का नग़मा है ..

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अफ़साना लिख रहा हूँ ..

उम्मीद

“आराम से…आराम से पैर रखना, देख कर …नीचे सीढ़ी है”, अक्षत अपनी बीवी आरती को बाँह से पकड़ कर सहारा…

खोना-पाना

“समर्थ…समर्थ …..ऐ समर्थ.. एक तो यह लड़का सुनता नहीं है बिल्कुल भी”, सुधा अपने बारह बरस के बच्चे को हर…

मिट्टी

“वाह मिश्रा जी वाह ! क्या गाना बनाया है !”, सनी सोफ़े पर बैठा हुआ अचानक टीवी की तरफ़ झुककर…

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